उत्तर प्रदेश में बन रहा Ganga Expressway सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह उन इलाकों के लिए आर्थिक बदलाव की कहानी बन चुका है जहां पहले रोजगार के साधन बेहद सीमित थे. इस एक्सप्रेसवे के आने से गांवों की जमीन, खेती, कारोबार और नौकरी के मौके तीनों में बड़ा असर देखने को मिल रहा है, खासकर गरीब किसानों के लिए.

एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई और रूट डिटेल
Ganga Expressway की कुल लंबाई लगभग 594 किलोमीटर रखी गई है, जो इसे देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स में शामिल करती है. यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ-बुलंदशहर क्षेत्र से शुरू होकर प्रयागराज तक जाएगा. रास्ते में यह कई जिलों से होकर गुजरेगा, जिससे पश्चिमी, मध्य और पूर्वी यूपी सीधे एक-दूसरे से जुड़ जाएंगे. इस लंबे रूट की वजह से छोटे शहर और गांव पहली बार बड़े आर्थिक कॉरिडोर का हिस्सा बन रहे हैं.
कितनी जमीन अधिग्रहित हुई और किसे फायदा मिला
Ganga Expressway के लिए करीब 7,400 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन का अधिग्रहण किया गया है. इस जमीन का बड़ा हिस्सा खेती योग्य था, जो गरीब और छोटे किसानों के पास था. सरकार की तरफ से जमीन का मुआवजा सीधे किसानों के खातों में दिया गया, जिससे कई परिवारों को एक साथ बड़ी रकम मिली. कई किसानों ने इस पैसे से नया घर बनाया, बच्चों की पढ़ाई में निवेश किया या छोटे कारोबार शुरू किए.
जमीन के दामों में कितना उछाल आया
एक्सप्रेसवे बनने से पहले जहां गांवों में जमीन के रेट बेहद कम थे, वहीं अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. कई इलाकों में जमीन की कीमतें 2 से 4 गुना तक बढ़ चुकी हैं. एक्सप्रेसवे के आसपास वेयरहाउस, इंडस्ट्रियल शेड, लॉजिस्टिक्स हब और पेट्रोल पंप के लिए जमीन की मांग तेजी से बढ़ रही है. इससे गरीब किसानों की जमीन अब सिर्फ खेती का साधन नहीं, बल्कि कमाई का बड़ा जरिया बन गई है.
रोजगार और लोकल इकोनॉमी पर असर
Ganga Expressway ने निर्माण के दौरान ही हजारों लोगों को रोजगार दिया. सड़क निर्माण, मिट्टी भराई, ट्रांसपोर्ट और मजदूरी के काम से गांव के लोगों को सीधे काम मिला. अब एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद ढाबे, होटल, ट्रक सर्विस, गोदाम और छोटे उद्योग खुलने लगे हैं. इससे स्थानीय युवाओं को गांव छोड़कर शहर जाने की मजबूरी कम हो रही है.
खेती और व्यापार को कैसे मिला फायदा
बेहतर कनेक्टिविटी की वजह से किसान अब अपनी फसल कम समय और कम खर्च में मंडियों तक पहुंचा पा रहे हैं. पहले जहां ट्रांसपोर्ट की वजह से लागत बढ़ जाती थी, अब वही लागत काफी हद तक कम हो गई है. फल, सब्ज़ी और अनाज बेचने वाले किसानों को सही दाम मिलने लगे हैं, जिससे उनकी आमदनी स्थिर और बेहतर हुई है.
भविष्य की योजनाएं और आगे की संभावनाएं
सरकार की योजना है कि Ganga Expressway के किनारे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स पार्क और नए टाउनशिप विकसित किए जाएं. आने वाले समय में जैसे-जैसे इंडस्ट्री और निवेश बढ़ेगा, वैसे-वैसे जमीन के दाम और रोजगार दोनों में और तेजी आएगी. इसका सबसे बड़ा फायदा उन्हीं गरीब किसानों और ग्रामीण परिवारों को मिलेगा, जिनके पास एक्सप्रेसवे के आसपास जमीन है.
