Agra–Lucknow Expressway: उत्तर प्रदेश के जिन गांवों में कभी खेती के अलावा कमाई का कोई बड़ा जरिया नहीं था, वहां आज जमीन की कीमतें तेजी से आसमान छू रही हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह बनी है Agra–Lucknow Expressway, जिसने पश्चिमी और मध्य यूपी के बीच कनेक्टिविटी की तस्वीर ही बदल दी. इस एक्सप्रेसवे ने गांवों को सीधे बड़े शहरों, इंडस्ट्री और रियल एस्टेट निवेश से जोड़ दिया है, जिससे गरीब और मिडिल क्लास किसानों की जमीन अब सोने जैसी कीमती मानी जा रही है.

एक्सप्रेसवे की लंबाई और रूट डिटेल
Agra–Lucknow Expressway की कुल लंबाई करीब 302 किलोमीटर है. यह एक्सप्रेसवे आगरा से शुरू होकर लखनऊ तक जाता है और रास्ते में फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, कन्नौज और उन्नाव जैसे कई जिलों से होकर गुजरता है. इस लंबे रूट की वजह से दर्जनों गांव सीधे हाई-स्पीड कॉरिडोर से जुड़ गए हैं. पहले जहां इन इलाकों से राजधानी या बड़े शहर पहुंचने में 6–7 घंटे लगते थे, वहीं अब यही सफर 3–4 घंटे में पूरा हो रहा है.
कितनी जमीन अधिग्रहित हुई
इस एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए करीब 3,600 से 4,000 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया था. इसमें बड़ी संख्या में किसानों की खेती वाली जमीन शामिल थी. सरकार की तरफ से जमीन का मुआवजा सीधे किसानों के खातों में दिया गया, जिससे कई गांवों में एक साथ बड़ी रकम आई. कई गरीब किसानों ने पहली बार लाखों रुपये एक साथ देखे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया.
जमीन की कीमतों में कितना उछाल आया
Agra–Lucknow Expressway बनने से पहले जहां गांवों में जमीन के रेट बेहद कम थे, वहीं अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. एक्सप्रेसवे के आसपास के गांवों में जमीन की कीमतें 2 से 5 गुना तक बढ़ चुकी हैं. जिन इलाकों में इंटरचेंज, सर्विस रोड और कट्स बने हैं, वहां जमीन की डिमांड और भी ज्यादा बढ़ी है. रियल एस्टेट डेवलपर्स, वेयरहाउस कंपनियां और इंडस्ट्रियल यूनिट्स इन इलाकों में तेजी से निवेश कर रहे हैं.
रियल एस्टेट और इंडस्ट्री को कैसे मिला फायदा
एक्सप्रेसवे के किनारे अब वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क, कोल्ड स्टोरेज और छोटे इंडस्ट्रियल यूनिट्स खुल रहे हैं. इससे जमीन की कमर्शियल वैल्यू तेजी से बढ़ी है. पहले जो जमीन सिर्फ खेती के लिए इस्तेमाल होती थी, अब वही जमीन किराए और बिक्री दोनों के जरिए स्थायी कमाई का साधन बन रही है. कई किसानों ने जमीन बेचकर शहरों में मकान खरीदे या बच्चों के लिए बिजनेस शुरू किए.
रोजगार और गांव की इकोनॉमी पर असर
एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान और बाद में गांवों में रोजगार के नए मौके बने हैं. ढाबे, होटल, पेट्रोल पंप, ट्रांसपोर्ट सर्विस और रिपेयर वर्कशॉप जैसे छोटे-बड़े कारोबार शुरू हुए हैं. इससे गांव के युवाओं को अपने ही इलाके में काम मिलने लगा है और शहरों की ओर पलायन में कमी आई है.
खेती और ट्रांसपोर्ट में राहत
बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से किसान अब अपनी फसल कम समय और कम खर्च में मंडियों तक पहुंचा पा रहे हैं. सब्ज़ी, फल और दूध जैसे खराब होने वाले प्रोडक्ट्स अब जल्दी बाजार पहुंच जाते हैं, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलने लगे हैं. ट्रांसपोर्ट खर्च घटने से खेती की कुल लागत भी कम हुई है.
आगे क्या और बढ़ेगी कीमत
जैसे-जैसे Agra–Lucknow Expressway के आसपास नई टाउनशिप, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स विकसित होंगे, जमीन की कीमतों में और उछाल आने की संभावना है. आने वाले वर्षों में यह इलाका उत्तर प्रदेश के सबसे तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट ज़ोन में शामिल हो सकता है.
